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हे मेघा जब मथुरा जाना

Posted On: 28 Jun, 2011 Others में

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हे मेघा जब मथुरा जाना

बरषि टपकि मोरे अँसुवन अस उनको है बतलाना |

वह बोलनि वह मिलनि कहू कस मनवा मोर लजात |

जल बिनु मीन नीर बिनु जस तुम वही हमारी बात |

दिनकर बिनु जस कुमुद कली ककस खिलेगी रात |

मोहन बिनु धिक् हमरो जीवन ह्रदय बरो  है जात |

हे जलधर ये प्यासे लोचन बुनत मिलन का ताना |

कह “रमेश” उर भेद रहा है यह विरह       का बाना |

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23 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

chaatak के द्वारा
July 6, 2011

आदरणीय बाजपेयी जी, सादर अभिवादन! विरह की सम्पूर्ण अभिव्यक्ति और साथ में शिकवे का ये अंदाज़ सहज ही पीड़ा को व्यक्त कर रहा है | एक और अच्छी रचना पर बधाई!

    rameshbajpai के द्वारा
    July 7, 2011

    प्रिय श्री चातक जी बहुत बहुत शुक्रिया |

Rajkamal Sharma के द्वारा
July 6, 2011

आदरणीय वाजपेई जी ….सादर प्रणाम ! आप से किये गए वादे के तहत अपनी तुच्छ बुद्धि और समझ के अनुसार एक लेख पोस्ट किया है … अगर आपको उससे कोई मदद मिल सके तो खुद को खुशकिस्मत समझूंगा …. जय श्री राधे कृष्ण

    rameshbajpai के द्वारा
    July 7, 2011

    प्रिय श्री राज जी इस बहुमूल्य पोस्ट का शुक्रिया

RaJ के द्वारा
June 29, 2011

अति सुन्दर , मन को भेदती धन्यवाद बाजपाई जी

    rameshbajpai के द्वारा
    July 7, 2011

    बहुत बहुत धन्यवाद , राज जी |

nishamittal के द्वारा
June 29, 2011

आदरनीय बाजपेयी जी,बहुत ही सुन्दर विरहगीत साथ ही लाज का पुट.बहुत दिन बाद आपकी रचना पढने को मिली.

    rameshbajpai के द्वारा
    July 7, 2011

    आदरणीया निशा जी बहुत बहुत शुक्रिया |

Rajkamal Sharma के द्वारा
June 28, 2011

हे जलधर ये प्यासे लोचन बुनत मिलन का ताना | आदरणीय वाजपेई जी ….सादर प्रणाम ! आपकी इस कविता की यह लाइन अपने आप में अनोखी है …. पता नहीं और किसी ने इस पर ध्यान दिया है की नहीं …. लेकिन इसमें छिपे हुए भाव विलक्षण है …. धन्यवाद व् आभार जय श्री राधेश्याम

    rameshbajpai के द्वारा
    July 7, 2011

    प्रिय श्री राज जी इन हार्दिक भावो का शुक्रिया

Alka Gupta के द्वारा
June 28, 2011

आदरणीय बाजपेयी जी , सादर अभिवादन आपने इस पद की रचना इतनी सुन्दर शैली में की है कि बार-बार पद को पढ़ती जा रही थी और अंतर में इसके गहन भाव उतरते जा रहे थे…… आपकी रचनाओं का बेसब्री से इंतज़ार रहता है ! बहुत ही बढ़िया रचना !

    Ramesh Bajpai के द्वारा
    July 4, 2011

    आदरणीय अलका बहन उन ब्रिज बालो का प्रभु के लिए बावरापन इतना मधुर है फिर आपकी स्नेह्पगी भावदृष्टि की मिठास तो मै खुद सदा महसूस करता हु | स्न्ढ़ व शुभ कामनाओ सहित

    Ramesh Bajpai के द्वारा
    July 4, 2011

    कृपया “बालाओ ” पढ़े

bmsharad के द्वारा
June 28, 2011

aa0 ramesh ji brajbhasha me madhurya bhari fuhaar …..badhaai …

    Ramesh Bajpai के द्वारा
    July 4, 2011

    इस फुहार को अनुरागी भावो से सराहने का शुक्रिया

आर.एन. शाही के द्वारा
June 28, 2011

कुछ पंक्तियों ने सदा की भांति उर को भेद दिया है । कान्हा प्रेम का बावरापन आपके भक्तिरस की एक जानी पहचानी परन्तु अविस्मरणीय सी छाप छोड़ जाता है । रमेश सर, बधाई ।

    Ramesh Bajpai के द्वारा
    July 4, 2011

    आत्मीय श्री शाही जी आपकी सहज व उदार भावनाओ के लिए सदा यह मन आतुर रहता है | बहुत बहुत शुक्रिया

roshni के द्वारा
June 28, 2011

आदरणीय वाजपयी जी नमस्कार क्रिशन के प्रति प्रेम से सराबोर रचनाये पढ़कर मन खुश हो जाता है .. आप बहुत ही खूबसूरती से क्रिशन गोपियों राधा का प्रेम विरह बयाँ करते है .. और हाँ आपकी मीरा की रचना का भी इंतज़ार है अपने कहा था की आप जल्द ही पोस्ट करेगे ..

    Ramesh Bajpai के द्वारा
    July 4, 2011

    रौशनी जी संत मीरा बाई की गिरधर प्रेम से भरी पोस्ट बस आप तक पहुचने ही वाली है | शुभकामनाओ सहित

shaktisingh के द्वारा
June 28, 2011

अत्यंत मधुर और रोचक लिखा है आपने, धन्यवाद

    Ramesh Bajpai के द्वारा
    July 4, 2011

    श्री शक्ति सिंह जी इस उदार प्रतिक्रिया का बहुत बहुत शुक्रिया |

abodhbaalak के द्वारा
June 28, 2011

आदरणीय बाजपेई जी बहुत सुन्दर, थोड़े में ही आपने इस तरह से दिल ….. http://abodhbaalak.jagranjunction.com

    Ramesh Bajpai के द्वारा
    July 4, 2011

    प्रिय श्री अबोध जी बहुत बहुत धन्यवाद |


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