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हे मीरा के गिरधारी

Posted On: 7 Jul, 2011 में

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हे मीरा के गिरधारी |

लोग कहै यह बाऊरि तिरिया ,संत     कहै     यह न्यारी |

जनम जनम उर धरे चरण प्रभु , नाम भजन अधिकारी |

मीरा के मन गिरधर बसते ,     पीताम्बर              धारी |

राणा तो उत नाग     पठायो , इत    जो खुली      पिटारी |

शालिग्राम    मिले     मीरा को ,जय     हो किशन मुरारी  |

गरल हलाहल     अमृत लागा ,मोहन      की      बलिहारी |

मीरा      रानी जोगिनी     बनिगै ,किरपा      पाई तुम्हारी|

हे मन      मोहन हे     मुरलीधर  ,       हे बृष  भानु दुलारी |

अब “ रमेश” मीरा गुन गावत ,     चाहत    कृपा तुम्हारी  |

मीरा रानी चाकर     प्रभु की ,तरि गयी      चरण पखारी   |

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21 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

वाहिद काशीवासी के द्वारा
August 6, 2011

आदरणीय बाजपेयी जी.. लम्बे समय के पश्चात आपकी पोस्ट पर आने का सौभाग्य प्राप्त हुआ..| प्रेमपूर्ण भक्ति से परिपूर्ण यह रचना आपकी अन्य रचनाओं की तरह ही आंचलिक खुशबू का लिबास पहने हुए है जो अनायास ही पाठक को अपने से जोड़ लेती है| साभार,

    rameshbajpai के द्वारा
    August 9, 2011

    प्रिय श्री वाहिद जी आपका समय निकल कर यहाँ आना बहुत अच्छा लगा | बहुत बहुत शुक्रिया |

roshni के द्वारा
July 8, 2011

आदरनिये वाजपेयी जी, आज आपके द्वारा मीरा के गिरधर कविता पढ़कर मन भाव विभोरे हो गया .. न जाने क्यों मुझे मीरा का प्रेम मीरा का समर्पण उसका विश्वास सब मन को कही गहरा छूता है और उनके बारे में पढ़कर मन कही बह निकलता है …… बहुत ही सुंदर रचना और धनयवाद मीरा जी की रचना के लिए आभार सहित

    rameshbajpai के द्वारा
    August 6, 2011

    आदरणीया रौशनी जी संत मीरा बाई के लिए आपके ह्रदय में जो स्थान है , उसकी मै बहुत कद्र करता हु | पोस्ट में देरी तो हो जाती है पर इस विषय पर लिखना अच्छा लगता है | बहुत बहुत शुक्रिया

Dharmesh Tiwari के द्वारा
July 8, 2011

आदरणीय बाजपाई जी सादर प्रणाम,,,,,,,,,,,,भक्ति का रस पिलाती अति सुन्दर शब्दों से सजी पंक्तिया,,,,धन्यवाद!!

    rameshbajpai के द्वारा
    August 6, 2011

    प्रिय श्री तिवारी जी कमेन्ट के लिए बहुत बहुत शुक्रिया

anoop pandey के द्वारा
July 8, 2011

आदरणीय रमेश जी….प्रथम द्र्स्टी में लगा की शायद मीरा का ही कोई भजन है……किन्तु अंतिम पंक्तियों से स्पस्ट हुआ…….आज भी कोई इन विधाओं में भजन लिखता है सोचा भी न था . आप निश्चय ही बधाई के पात्र हैं.

    Ramesh Bajpai के द्वारा
    July 8, 2011

    प्रिय श्री पाण्डेय जी संत मीरा बाई के गिरधर प्रेम से भरे इन भावो पर आपके अमूल्य विचारो का स्वागत है | मै अभी आपके ब्लॉग पर नहीं पहुच पाया ,लिंक दीजियेगा | बहुत बहुत शुक्रिया

    anoop pandey के द्वारा
    July 8, 2011

    आदरणीय रमेश जी….अपने ब्लॉग पर आपका कमेन्ट देखा…….तो लिंक जुड़ गया है आपसे…..आशा है BSNL की तरह बारबार टूटेगा नहीं.

Rajkamal Sharma के द्वारा
July 7, 2011

आदरणीय वाजपेई जी ….जय श्री राधेश्याम ! बहुत ही आत्मभावन रचना …. इस मंच पर श्री कृष्ण और माता के भक्ति रस में डुबोने वाले आप है और दूसरे आदरणीय भर्मर जी …. आपकी ऐसी रचना हमेशा ही किसी पुरातन युग में पहुंचा देती है …. यही आपकी खासियत है …. बस नियमित अंतराल पर इस धारा को प्रवाहित करते रहिएगा …. आभार

    Ramesh Bajpai के द्वारा
    July 8, 2011

    प्रिय श्री राज जी प्रभु के नाम का जादू तो बस सर पर चढ़ कर ही बोलता है ,आपके अन्तःमन में तो इन भावो का सागर ही भरा है | उनके नाम की ये फुहारे उस मन के भक्ति सागर में मिलकर हमें भी उपकृत कर ही देती है पर इसका श्रेय आपको ही है | प्रिय श्री शुक्ल जी बहुत ही सरल व सहज तरीके से उदार संवेदना की जो रसधार बहाते है वह अवर्णनीय होती है | बहुत बहुत धन्यवाद | जय श्री राधे |

allrounder के द्वारा
July 7, 2011

आदरणीय बाजपेई जी, आपकी अतुलनीय शैली मैं रची गई इस अति विशिष्ट रचना पर हार्दिक अभिनन्दन !

    Ramesh Bajpai के द्वारा
    July 8, 2011

    प्रिय श्री सचिन जी भावो की सहज धार को महसूस कर रहा हु | बहुत बहुत शुक्रिया

Alka Gupta के द्वारा
July 7, 2011

आदरणीय बाजपेयी जी , सादर अभिवादन भक्ति रस से सराबोर इस गेय पद ने अंतर को भक्ति से आर्द्र कर आनंदित कर दिया ! आपकी कालजयी रचनाएँ पढ़कर बहुत आनंद आता है ! अति सुन्दर रचना !

    Ramesh Bajpai के द्वारा
    July 8, 2011

    आदरणीया अलका जी सच कहू तो संत मीरा बाई जी , जगत जननी राधा जी व ब्रिज बालाओ के मुरलीमनोहर के प्रति अगाथ प्रेम को शादो में पिरो पाना मुझ जैसो के बस में नहीं है | पर उनकी कृपा की फुहार मिल ही जाती है | फिर आपके अपने भाव मिठास की बारिश कर ही देते है | बहुत बहुत शुक्रिया |

surendr shukl bhramar5 के द्वारा
July 7, 2011

आदरणीय बाजपेयी जी भाकित रस में डूबा दिया आप ने -अति सुन्दर बधाई हो -मीरा के प्रभु गिरिधर नागर .. गरल हलाहल अमृत लागा ,मोहन की बलिहारी | मीरा रानी जोगिनी बनिगै ,किर पा पाई तुम्हारी| ये किर पा पाई जो दूर दूर लिखा आप ने कुछ भाव गूढ़ या अलग समझाएं शुक्ल भ्रमर ५

    Ramesh Bajpai के द्वारा
    July 7, 2011

    प्रिय श्री शुक्ल जी ” किर पा ” गलती से दूर हो गया है | यू भी इधर पेज सेट करने में कुछ गलती हो रही है मुझसे , जो भी लिखता हु पोस्ट में उसकी सेटिंग बदल जा रही है | पिछली पोस्ट में भी यही हुआ था | इस बार भी वही हुआ | भावो को सराहने का शुक्रिया |

nikhil pandey के द्वारा
July 7, 2011

प्रणाम सर बहुत ही सुन्दर रचना है … पढ़कर आनंद आ गया … ये सब क्लासिकल रचनाये है .. वो रचनाकार को भी विशिष्ट बनती है … भक्ति रस में रमी ये रचना पढ़ कर लगा मानो .. कोई भक्तिकालीन कवि की रचना पढ़ रहे हो

    Ramesh Bajpai के द्वारा
    July 7, 2011

    प्रिय श्री निखिल जी बहुत दिनों पर संवाद हुआ आपसे | बहुत बहुत धन्यवाद |

Vinita Shukla के द्वारा
July 7, 2011

भक्तिरस में पगी सुन्दर रचना. बधाई आपको.

    Ramesh Bajpai के द्वारा
    July 7, 2011

    बहुत बहुत शुक्रिया |


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