MERI NAJAR

Just another weblog

78 Posts

1661 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 2222 postid : 669

मृग लोचनि नयना द्वय कारे

Posted On: 10 Jul, 2011 में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

मृग लोचनि नयना द्वय कारे |

नभ   अषाढ    छाए घन कुंतल ,मुख   मंडल       लट डारे |

छवि ललाट लखि अरध चन्द्र ज्यो,बिंदिया मोहनि मारे |

दीठि   उठनी   छवि  पलक पलटि,चितवनि   वार करारे |

रक्तिम    अधर   मनोहर   नाशा,   चिबुक    बड़े   मतवारे |

रूप   लोभ   तिल    बनि बसिगे , भ्रमर    ये      कारे कारे |

दंतावलि   चपला सो         चमकति, मेघन तोरि किनारे |

ग्रीवा गढ़नि      सुरा घट केरी , मद          के बहत पनारे |

कटि कंचन बल खाति चपल बनि ,अवनि जबहि पग डारे |

पायल   छम्म छमा छम बाजति , मनहि     बांसुरी     वारे |

राधा          रानी         रूप      सलोना , मोहन   जादू    डारे |

मन अंखियन छवि लख्यो मातु री नयन न “रमेश” उघारे |

|

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (No Ratings Yet)
Loading ... Loading ...

20 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

ashvinikumar के द्वारा
August 10, 2011

आदरनीय वाजपेयी जी,, सादर अभिवादन अत्याधिक स्म्योप्रांत आपके मंच पर आने के लिए क्छ्मा प्रार्थी हूँ ,,दरअसल अभी भी आ नही पाता परन्तु अनीता जी के ब्लॉग पर आपने उक्त प्यारी बिटिया को समझाने का प्रयत्न किया था तो वहीं से आपके मंच पर आने की प्रबल इच्छा हुई आपकी उक्त प्यारी बिटिया तो समझने से रही ! उसी दिन मे आपके मंच पर कमेन्ट करने का प्रयाश करता रहा परन्तु कई बार प्रयाश करने के उपरान्त भी कमेन्ट लोड नही हो पाया ,,और उक्त कमेन्ट को मैनेसुरक्छित नही रक्खा था तो आज पुनः उपस्थित हूँ :) आपके काव्य तो हमेशा से ही मन को हर्षित करते रहे हैं आज भी काव्य माधुर्य ने मंच को कृष्णमय कर दिया ….जय हो वृन्दावनचारी गिरिधारी मुरलीधर राधा जीवन की………………………जय भारत

    Ramesh Bajpai के द्वारा
    August 11, 2011

    प्रिय श्री अश्विनी जी आपकी अनुराग सिक्त उपस्थिति ने मन को बहुत उत्साहित कर दिया | यद्यपि यहाँ पहुचने में बाधाये आई पर आपका अपनत्व आपको यहाँ खीच लाया | आपकी उदारता से मिले ये पल बहुत अच्छे लगे | राधा रानी के माधुर्य की मिठास आपको अच्छी लगी ,तो यकीनन मेरा लिखना सार्थक हुआ | जय श्रीक्रष्ण ,जय भारत |

supriyo के द्वारा
August 6, 2011

आदरणीय प्रिय बाजपई अंकल जी प्रणाम बहुत ही सुन्दर और श्रींगार रस से परिपूर्ण उत्तम सृजन साहित्य के लिए आपको सह्रिदै धन्यवाद जानते है अंकल जी आपकी इस ब्रजभासा की रचना को पढने के लिए सब्दकोश का सहारा लेना पढ़ा धन्यवाद अंकल जी अपना ख्याल रखियेगा आपका सुप्रिय

    rameshbajpai के द्वारा
    August 6, 2011

    प्रिय श्री सुप्रियो जी आपके सरल व सहज अंदाज को दिल से महसूस कर रहा हू | आपकी साहित्यिक रूचि बहुत अच्छी लगी | अगर कुछ शब्दों को समझने में परेशानी हो तो बताईयेगा | हार्दिक मंगल कामनाये |

allrounder के द्वारा
July 11, 2011

आदरणीय बाजपेई जी, एक बार फिर से बेहतरीन साहित्यिक रचना पर हार्दिक अभिनन्दन !

    rameshbajpai के द्वारा
    August 6, 2011

    प्रिय श्री सचिन जी बहुत बहुत धन्यवाद |

alkargupta1 के द्वारा
July 11, 2011

आदरणीय बाजपेयी जी , सादर अभिवादन सुन्दर साहित्यिक शैली से सजी संवरी मनोहारी रचना ! राधा रानी के अनुपम सौंदर्य ने मोहन पर अपना जादू डाल कर उन्हें रिझा लिया !

    rameshbajpai के द्वारा
    August 6, 2011

    आदरणीया अलका बहन बहुत बहुत शुक्रिया |

anoop pandey के द्वारा
July 11, 2011

आदरणीय वाजपेई जी राधा रानी जी का सुन्दर चित्र उकेरा है आपने. यदि छंद निर्माण में मात्रा की अधिक समस्या न आये तो पायल छम्म छमा छम बजति के स्तन पर बाजति करने पर अधिक सरलता से गाया जा सकेगा

    anoop pandey के द्वारा
    July 11, 2011

    कृपया ” स्थान” पढ़ें

    rameshbajpai के द्वारा
    August 6, 2011

    प्रिय श्री पाण्डेय जी “बजति ” के स्थान पर बाजति ही था लिखने में ही गलती हुयी है , बहुत बहुत धन्यवाद |

Rajkamal Sharma के द्वारा
July 10, 2011

आदरणीय वाजपेई जी ….सादर प्रणाम ! बहुत ही सुन्दर और मनभावन है आपकी यह भक्तिमय रचना आपने भ्रमर जी का नाम इस्तेमाल किया अब अगली बार उनकी बारी है धन्यवाद

    atharvavedamanoj के द्वारा
    July 10, 2011

    आदरणीय वाजपेयी जी, सादर चारण स्पर्श| वृन्दावन में एक रमा और हैं एक रमेश| बाकी सब बेकार है सहस सारदा, शेष||

    rameshbajpai के द्वारा
    August 6, 2011

    प्रिय श्री राज जी बहुत बहुत शुक्रिया |

    rameshbajpai के द्वारा
    August 6, 2011

    प्रिय श्री मनोज जी इन अमूल्ल्य भावो का शुक्रिया |

surendra shukla bhramar5 के द्वारा
July 10, 2011

आदरणीय बाजपेयी जी बहुत सुन्दर -रस छलकता सौन्दर्य रस से ओत प्रोत प्रकृति को क्या सजाया आप ने -सूर-रसखान और तुलसी की दुनिया में पहुँच गए भ्रमर तो बहुत सुन्दर आप के शव्द माँ सरस्वती की कृपा … रक्तिम अधर मनोहर नाशा, चिबुक बड़े मतवारे | रूप लोभ तिल बनि बसिगे , भ्रमर ये कारे कारे | ये तिल तो जान लेने को आतुर …. भ्रमर ५

    rameshbajpai के द्वारा
    August 6, 2011

    प्रिय श्री शुक्ल जी आपके इन प्रेम पगे उदगारो का शुक्रिया |

nishamittal के द्वारा
July 10, 2011

आदरनीय बाजपेयी जी,आपकी रचना बहुत मनोहारी साहित्यिक होती हैं सदा की भांति आपकी रचना बहुत अच्छे है.

    nishamittal के द्वारा
    July 10, 2011

    कृपया अच्छी पढ़ें.

    rameshbajpai के द्वारा
    August 6, 2011

    आदरणीया निशा जी इन अमूल्ल्य भावो का बहुत बहुत शुक्रिया


topic of the week



latest from jagran