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कितनी सुन्दर मेरी झाँसी

Posted On: 11 Aug, 2011 में

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सागर चरण पखारे जिसके


सुन्दर है परिवेश

भिन्न भिन्न है बोल बोलते

किसिम किसिम के वेष

फिर भी हम सब एक है

देते है संदेस |||

सुन्दर मेरी मथुरा ,काशी

पतित पावनी गंगा

दर्शन करके विश्वनाथ के

मन होता है चंगा

आशुतोष प्रभु अमरनाथ में

रहते भारत देश |||

झाँसी मेरी कितनी सुन्दर

जहा लड़ी मर्दानी थी

कानपुर ने रच डाली

आजादी की क़ुरबानी थी

बीर भगत सिंह का जायज था

अंग्रेजो के प्रति रोष |||

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35 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Aakash Tiwaari के द्वारा
August 15, 2011

आदरणीय श्री बाजपेई जी, आपसे कई बार मोब.. पर सम्पर्क करना चाहा लेकिन मोब. बंद था…. आपकी रचनाओं को पढता ही रहता हूँ.. आकाश तिवारी

    Ramesh Bajpai के द्वारा
    August 15, 2011

    प्रिय श्री आकाश जी मेरा वह न० किसी कारण से लाक हो गया है | आपकी कमी सब को बहुत महसूस होती है | कृपया 09336003882 पर अपना न 0 यस एम यस कर दे | शुभ कामनाओ सहित

Arunesh Mishra के द्वारा
August 15, 2011

आदरणीय बाजपेयी, देशभक्ति के भाव से भरी रचना के लिए आभार…

    Arunesh Mishra के द्वारा
    August 15, 2011

    माफ़ कीजियेगा..”आदरणीय बाजपेयी जी”..लिखना चाहता था लेकिन keypad धोखा दे गया…

    Ramesh Bajpai के द्वारा
    August 15, 2011

    प्रिय श्री अरुणेश जी इस जज्बे के लिए हार्दिक शुक्रिया | आपके भाव इतने सुन्दर है फिर संबोधन की त्रुटियों की तरफ ध्यान ही नहीं जाता | शुभ कामनाओ सहित , जय भारत |

आर.एन. शाही के द्वारा
August 14, 2011

रमेश सर, आज़ाद-हिंद को कविता के माध्यम से बेहतरीन सलामी देने के लिये आभार !

    rameshbajpai के द्वारा
    August 14, 2011

    आत्मीय श्री शाही जी आपकी उपस्थिति से बहुत अच्छा लगा | अति व्यस्तता के कारण आपको फोन भी नहीं कर सका | हार्दिक मंगल कामनाये |

rita singh 'sarjana' के द्वारा
August 14, 2011

आदरणीय श्री वाजपेयी जी ,सादर अभिवादन , कईदिनों से प्रतिक्रया देने का प्रयास कर रही हूँ ,नेट प्रो.के लिए हो नहीं पा रहा था l देश-प्रेम से भरी इस सुन्दर कविता के लिए बधाई l

    rameshbajpai के द्वारा
    August 14, 2011

    रीता जी इस समय कमेन्ट देना काफी मुश्किल हो रहा है | आपके विचारो ने उत्साह वर्धन किया है | बहुत बहुत शुक्रिया | आपके स्वस्थ्य के लिए हार्दिक शुभ कामनाये |

nikhil jha के द्वारा
August 14, 2011

आदरणीय वाजपेयी जी, उत्तम रचना. बधाई.

    rameshbajpai के द्वारा
    August 14, 2011

    प्रिय श्री निखिल जी बहुत बहुत शुक्रिया |

abodhbaalak के द्वारा
August 13, 2011

आदरणीय रमेश जी देश प्रेम की भावना जगा देती हैं इस तरह की रचनाएँ और आप के लिखने का एक अलग ही रंग होता है

    Ramesh Bajpai के द्वारा
    August 13, 2011

    प्रिय श्री अबोध जी इन हार्दिक उदगारो का स्वागत है | आपके लिए हार्दिक मंगल कामनाये | जय भारत |

Dharmesh Tiwari के द्वारा
August 12, 2011

आदरणीय बाजपाई जी सादर प्रणाम,,,,,,,,सुन्दर देश का बखान करती सुन्दर लाईने,,,,,,धन्यवाद!

    Ramesh Bajpai के द्वारा
    August 12, 2011

    प्रिय श्री धर्मेश जी इस सुन्दर प्रतिक्रिया के लिए शुक्रिया |

Santosh Kumar के द्वारा
August 12, 2011

आदरणीय रमेश जी ,.सादर प्रणाम माँ भारती का अतिसुंदर चित्रण ,.. देशप्रेम की यह ज्वाला सबके ह्रदय में सदैव प्रज्जवलित रहे ,.. वन्देमातरम

    Ramesh Bajpai के द्वारा
    August 12, 2011

    priy shri santosh ji in bhav bhare udgaro ki mahak se man sarabor ho gaya| desh prem ki yah jvala har dil me jage yahi ummid hai | bahut bahut shukriya | jay bharat jay bharti|

    Ramesh Bajpai के द्वारा
    August 12, 2011

    प्रिय   श्री संतोष जी इन भाव भरे उदगारो की महक से मन सराबोर हो गया | देश प्रेम की यह ज्वाला हर दिल में जगे यही उम्मीद है | बहुत बहुत शुक्रिया | जय भारत जय भारती |

chaatak के द्वारा
August 11, 2011

स्वाधीनता दिवस से पहले राष्ट्र-प्रेम के इस स्वर को पढ़कर बड़ा अच्छा लगा| खूबसूरत रचना पर हार्दिक बधाई!

    Ramesh Bajpai के द्वारा
    August 12, 2011

    राष्ट्र प्रेम से ओतप्रोत आपके विचारो को प्राप्त कर बहुत अच्छा लगा | माँ भारती का यह चित्रण आपके अमूल्य विचारो से महक उठा है | बहुत बहुत शुक्रिया |

neelamsingh के द्वारा
August 11, 2011

देशप्रेम के भाव से भरी सुन्दर कविता ! कितना प्यारा मेरा देश , सागर चरण पखारे जिसके सुन्दर है परिवेश | जय भारत जय भारती !

    Ramesh Bajpai के द्वारा
    August 12, 2011

    माँ भारती के सुन्दर रूप का यह प्रयास आपको अच्छा लगा , तो लेखन सार्थक हुआ | बहुत बहुत शुक्रिया | जय भारत जय भारती |

वाहिद काशीवासी के द्वारा
August 11, 2011

परम आदरणीय बाजपेयी जी, लंबे समय के पश्चात् आपकी कविता पर प्रतिक्रिया देने का अवसर प्राप्त हुआ| अत्यंत ही सुन्दर शब्द जो देश की सुंदरता के साथ ही वीरता का भी बखान कर रहे हैं| साभार,

    Ramesh Bajpai के द्वारा
    August 12, 2011

    प्रिय श्री वाहिद जी इन मनोहारी उदगारो का बहुत बहुत शुक्रिया |

alkargupta1 के द्वारा
August 11, 2011

आदरणीय बाजपेयी जी ,सादर अभिवादन अपने भारत देश के सच्चे स्वरूप का गुणगान करती अति सुन्दर मनोहारी रचना ! जय भारत माता !

    Ramesh Bajpai के द्वारा
    August 12, 2011

    आदरणीया अलका जी माँ भारती की सतरन्गिता में समाहित एकता को पोषित करने का यह प्रयास आपको अच्छा लगा तो लेखन सार्थक हुआ | बहुत बहुत शुक्रिया | जय माँ भारती |

Vinita Shukla के द्वारा
August 11, 2011

देशप्रेम के उदगार समाहित किये हुए, सुन्दर रचना. बधाई.

    Ramesh Bajpai के द्वारा
    August 12, 2011

    आदरणीया विनता जी राष्ट्रीयता के इस जज्बे को सराहने का शुक्रिया |

surendra shukla Bhramar5 के द्वारा
August 11, 2011

आदरणीय बाजपेयी जी …सारे जहाँ से अच्छा हिंदुस्तान हमारा …आखिर आप ने रोमांचकता भर के गवा ही दिया न जाने क्यों अब वो जज्बा जोश गायब होता जा रहा है खुबसूरत रचना-मूल भाव सुन्दर- प्यारा सन्देश बधाई हो शुक्ल भ्रमर ५

    surendra shukla Bhramar5 के द्वारा
    August 11, 2011

    प्रिय बाजपेयी जी जनता की बात पर गौर करिए .. इस रचना के लिए उपयुक्त शीर्षक दे दीजिये… अपना सुन्दर भारत देश …..अपना प्यारा भारत देश ….कुछ भी ..क्योंकि झाँसी रानी के अलावा इस में बहुत कुछ आप ने पिरोया है …जय हिंद भ्रमर ५

    Ramesh Bajpai के द्वारा
    August 12, 2011

    प्रिय श्री शुक्ल जी सुन्दर प्रतिक्रिया के लिए बहुत बहुत शुक्रिया |

    Ramesh Bajpai के द्वारा
    August 12, 2011

    प्रिय श्री शुक्ल जी इन अमूल्य सुझावों के लिए धन्यवाद

ashvini.kumar के द्वारा
August 11, 2011

आदरणीय वाजपेयी जी सादर अभिवादन ,,शीर्षक कुछ असंगत लग रहा है ( क्षमा करें परन्तु रचना पढ़ने के उपरान्त मुझे यही लगा ) माँ भारतीय के विविध रूपों से सराबोर अति सुन्दर काव्य )…………….जय भारत

    ashvini.kumar के द्वारा
    August 11, 2011

    (माँ भारती)

    Ramesh Bajpai के द्वारा
    August 12, 2011

    स्नेही स्वजन माँ भारती के वैविध्य को चित्रित करने का प्रयास किया है |तकनीकी कारणों से प्रीव्यू के दौरान ही वहा सिर्फ शीर्षक ही आ रहा था | काफी परेशान होने के बाद मैंने आखिर में पब्लिश का बटन दबा दिया | इस लिए पोस्ट पूरी नहीं हो सकी | इन उदार भावो का बहुत बहुत शुक्रिया |


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