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अनीता पॉल कही नजर आती है |

Posted On: 2 Sep, 2011 Others में

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गीत है गजल है या कहानी है |

बस यही बात तो बतानी है |

ओस की बूंदों सी झिलमलाती है |

छू मत लेना बिखर भी जाती है |

यादो में आती है तो रुलाती है |

हंसती है गाती है गुनगुनाती है |

हौसले से उड़ कल्पना चावला बन जाती है |

मात्र भूमि के लिए झाँसी में लड़ जाती है |

सीता, सावित्री , दर्गा बन पूजी जाती है |

बेटी , बहन, माँ भी तो कही जाती है |

नारी के इन रूपों को जरा गौर से देखो

बिटिया अनीता पॉल कही नजर आती है |

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59 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

surendra shukl bhramar5 के द्वारा
September 28, 2011

बाजपेयी जी अभिवादन मै इस मुद्दे पर कम से कम चार बार प्रतिक्रिया न जाने जागरण जंक्शन को क्या हुआ कल से सारी गायब छू मंतर …आप की प्रतिक्रियाएं न पढ़ी जाएँ जिससे दिल को सुकून और जोश मिलता है आप कैसे सोचे ? मेरी भी तवियत हरी हो जाती है जब आप से विचारवान समर्थन में आते हैं … आप अपनी प्रतिक्रियाओं में ऐसे लिंक लगा कर रखें, http://rameshbajpai.jagranjunction.com या अपनी पोस्ट खोलें और सबसे ऊपर नेट के ब्राउजर को कॉपी कर लगा दिया कीजिये … आभार भ्रमर ५

surendra shukla bhramar5 के द्वारा
September 25, 2011

बाजपेयी जी कुछ भी बेकार नहीं जाता थोडा देर में ही सही लेकिन प्रतिक्रिया का सम्मान जरुर होता है आप ने शायद मेरी पोस्ट पर अपना उत्तर न पढ़ा हो …ये रही आप की लिंक जब भी कमेन्ट कीजिये कहीं इस कापी कर पेस्ट कर दीजिये फिर आप के पोस्ट पर आसानी से कोई पहुंचेगा http://rameshbajpai.jagranjunction.com/2011 या तो आप की इस पोस्ट की लिंक ऊपर से कापी कर लीजिये नेट के ब्राउजर से सब से ऊपर देखिये http://rameshbajpai.jagranjunction.com/2011/09/02/%e0%a4%85%e0%a4%a8%e0%a5%80%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%aa%e0%a5%89%e0%a4%b2-%e0%a4%95%e0%a4%b9%e0%a5%80-%e0%a4%a8%e0%a4%9c%e0%a4%b0-%e0%a4%86%e0%a4%a4%e0%a5%80-%e0%a4%b9%e0%a5%88/

surendra shukla bhramar5 के द्वारा
September 24, 2011

बाजपेयी जी ये रही आप की लिंक इस पोस्ट की —ऊपर ब्राउजर से जहाँ से नेट खुल रहा है … बस कापी कर के लगा देना है … http://rameshbajpai.jagranjunction.com/2011/09/02/%e0%a4%85%e0%a4%a8%e0%a5%80%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%aa%e0%a5%89%e0%a4%b2-%e0%a4%95%e0%a4%b9%e0%a5%80-%e0%a4%a8%e0%a4%9c%e0%a4%b0-%e0%a4%86%e0%a4%a4%e0%a5%80-%e0%a4%b9%e0%a5%88/ या तो http://rameshbajpai.jagranjunction.com/2011

surendra shukla bhramar5 के द्वारा
September 24, 2011

प्रिय और आदरणीय बाजपेयी जी दूसरी प्रतिक्रिया तो नहीं पढ़ा था सच है लेकिन नुकसान नहीं होता बाद में भी नजर तो आता ही है अपने आई दी की लिंक अपने कमेन्ट के नीचे बस लगा दीजिये फिर सब उस पर आराम से पहुंचा करेंगे जैसे यहाँ नीचे है ….सिग्नल नेट की समस्या आज कल है हमारे पास ….. भ्रमर ५ बाज पेयी जी आप का लिंक ये रहा ————बस इसे पेस्ट कर दिया कीजिये कमेन्ट के साथ …या तो जो पोस्ट आप की नयी हो उसे ऊपर ब्राउजर से कापी करके ……. http://rameshbajpai.jagranjunction.com/ या तो इस पोस्ट की लिंक http://rameshbajpai.jagranjunction.com/2011/09/02/%e0%a4%85%e0%a4%a8%e0%a5%80%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%aa%e0%a5%89%e0%a4%b2-%e0%a4%95%e0%a4%b9%e0%a5%80-%e0%a4%a8%e0%a4%9c%e0%a4%b0-%e0%a4%86%e0%a4%a4%e0%a5%80-%e0%a4%b9%e0%a5%88/

ashvinikumar के द्वारा
September 17, 2011

आदरणीय वाजपेयी जी सादर अभिवादन ,,,इन सारी लाएनों में कहीं आपकी वह प्यारी बिटिया नजर नही आती ,,,आभाष मात्र है सत्य नही फिर नजर किसे वो आयेगी ,,…………..जय भारत

    ashvinikumar के द्वारा
    September 17, 2011

    जिस पितृत्व भाव ने आपके ह्रदय को झंकृत कर दिया ,,ऐसी ही संवेदना ईश्वर उनके भी ह्रदय में उत्पन्न करें मे ईश्वर से यही प्रार्थना करता हूँ ,,लेकिन ईश्वर पर भी पुरुष होने एवं पुरुषवादी का आरोप न मढ़ दें :)

    Ramesh Bajpai के द्वारा
    September 17, 2011

    स्नेही श्री अश्विनी जी क्या खूब आपने कहा जिस ” आभाष मात्र है ” का जिक्र आपने किया है कदाचित उस दिव्यता तक पहुचने के लिए आवश्यक आत्मिक वात्सल्य की गहनता तो आप महसूस ही कर रहे है | बस एक बार मेरी नजरो से दृष्टि डाल लीजिये | मात्र इतना अनुरोध / निवेदन है | हमेशा की तरह आपकी अगाध स्नेह सिक्तता का आकांक्षी | शुभ कामनाओ सहित

    Ramesh Bajpai के द्वारा
    September 17, 2011

    प्रिय श्री अश्विनी जी आपके औदार्य की स्नेहिल दुआ ईश्वर काबुल न करे तो यह अन्याय कहा जायेगा | बाकि बिटिया तो बच्ची है | पर प्रिय भाई एक दिन जरुर बड़ी होगी , इतना विश्वास अवश्य है | आपके उन्ही औदर्यमई भावो से उपकृत होने का आकांक्षी |

meenakshi के द्वारा
September 15, 2011

बाजपेयी जी , प्रणाम – वर्तमान की स्थिति दर्शाती और चिंतित कर देने वाली. .निकट …..भविष्य में..” एक गूढ़ अर्थ छिपाए सुन्दर रचना “- सबक देने की शक्ति रखती है.. मीनाक्षी श्रीवास्तव

    Ramesh Bajpai के द्वारा
    September 15, 2011

    आदरणीया मीनाक्षी जी इस व्यापक दृष्टि कोण से भावो को परखने का बहुत बहुत शुक्रिया |

Anita Paul के द्वारा
September 14, 2011

परम आदरणीय बाजपेयी जी, आपकी सम्मानित करने वाली लेखनी से निश्चित ही आंखें भर आएंगी. आपने मुझे ध्यान रखते हुए जो लिखा है उसे नकारना मेरे वश से बाहर की बात है. किंतु मेरा विरोध आप जैसे लोगों से नहीं है बल्कि उनसे है जो स्त्री को हमेशा दासी ही बनाए रखना चाहते हैं लेकिन आवरण दे देते हैं संस्कार, मर्यादा और धर्म का. यकीनन उनकी मंशा में खोट है और यही कारण है कि वे अपने ऊपर लगाए किसी भी आरोप से इतना तिलमिला जाते हैं कि सार्थक संवाद हो ही नहीं पाता. आपको मेरा नमन……………..

    Ramesh Bajpai के द्वारा
    September 15, 2011

    अनीता जी विद्वानों ,साहित्यकारों से भरे इस मंच पर बेटियों , बहनों को उचित संरक्षण ,सम्मान व आदर मिलना ही चाहिए | वैचारिक मतान्तर , सार्थक संवाद , स्वस्थ्य बहस हम सब में हो सकती है | आप सफलता के नए कीर्तिमान स्थापित करे यही दुआ है | हमेसा हँसती मुस्कराती रहे | ईश्वर आपको शक्ति व हौसला दे की आप खुशियों को महसूस करे व बांटे | हमारा संरक्षण , दुलार हर पल आपके साथ |

Manas के द्वारा
September 13, 2011

आदरनिये बाजपाई जी बेटिओं के लिए कोमल भावों से सजी यह पोस्ट सुंदर है , बधाई….

    Ramesh Bajpai के द्वारा
    September 15, 2011

    प्रिय श्री मानस जी भावो की इस मधुरिमा के लिए बहुत बहुत शुक्रिया |

आर.एन. शाही के द्वारा
September 9, 2011

बीवी बहन मां बेटी नहीं कोई, पैसे का सब रिश्ता है, इन्सां का जज़्बात यहां पर मिट्टी से भी सस्ता है, औरत बन कर इस कूचे में, रहती औरत कोई नही । बच के निकल जा इस बस्ती में करता मोहब्बत कोई नहीं ॥ … रमेश सर, आपके जज़्बे की भी दाद देनी पड़ेगी … आभार !

    Ramesh Bajpai के द्वारा
    September 10, 2011

    आत्मीय श्री शाही जी यह अंदाजे बंया , इसका कहना ही क्या | मै तो बस …. न ख्वाहिस है मुहब्बत की , न जज्बात का पैमाना है | दो लम्हे खिल खिलाहट के ,बाटू बस यही ठाना है | आंसू तो सरे राह मिलते है , ठुकराता ये जमाना है | थपकी इक दुलार की , प्यार का नजराना है | हार्दिक शुक्रिया

वाहिद काशीवासी के द्वारा
September 9, 2011

आदरणीय बाजपेयी जी, सर्वप्रथम विलम्ब से आने के लिए दण्डावनत हूँ| आपकी कविता के सुन्दर भाव पढ़ते-पढ़ते निदा फाज़ली साहिब की एक नज़्म याद आ गयी - बीवी-बेटी-बहन-पड़ोसन सबमें थोड़ी-थोड़ी सी, फटे पुराने एक अल्बम में चंचल लड़की जैसी माँ। वैसे तो ये नज़्म माँ को संबोधित कर के लिखी गयी थी पर इसके कुछ भाव आपकी कविता में भी समाहित हैं। नारी अपने स्त्रियोचित गुणों के लिए ही जानी जाती है, लज्जा ही उसका आभूषण है और शील ही उसका श्रृंगार। शेष मैं क्या कहूँ आपने स्वयं ही अपनी कविता के माध्यम से सब कुछ कह दिया है। आभार सहित,

    Ramesh Bajpai के द्वारा
    September 9, 2011

    priy shri vahid ji is bahumuly pratikriya ke liye hardik dhanyvad

    Ramesh Bajpai के द्वारा
    September 10, 2011

    “फटे पुराने एक अल्बम में चंचल लड़की जैसी माँ ” प्रिय श्री वाहिद जी इन खूब सूरत शब्द्दो के लिए हार्दिक शुक्रिया |कभी मौका मिले तो इस नज्म का उपहार दे कर उपकृत करे |

    वाहिद काशीवासी के द्वारा
    September 10, 2011

    परम आदरणीय बाजपेयी जी, आपके आदेश के अनुपालन में वो नज़्म यहाँ पेश कर रहा हूँ जो मेरे दिल के बेहद क़रीब है। पंकज उधास की आवाज़ में सुरबद्ध इस नज़्म का लिंक अभी उपलब्ध नहीं है अतः फ़िलहाल इसी से संतुष्ट होने का प्रयास करें। बेसन की सौंधी रोटी पर खट्टी चटनी जैसी माँ, याद आती है चौका बासन चिंता फुंकनी जैसी माँ; बांस की खुर्री खाट के ऊपर हर आहट पर कान धरे, आधी सोई आधी जागी थकी दुपहरी जैसी माँ; चिड़ियों की चहकार में गूंजे राधामोहन अली अली, मुर्ग़े की आवाज़ से खुलती घर की कुण्डी जैसी माँ; बीवी बेटी बहन पड़ोसन थोड़ी-थोड़ी सी सब में, दिन भर इक रस्सी के ऊपर चलती नटिनी जैसी माँ; बाँट के अपना चेहरा माथा आँखें जाने कहाँ गईं, फटे पुराने इक अल्बम में चंचल लड़की जैसी माँ; साभार,

    वाहिद काशीवासी के द्वारा
    September 10, 2011

    चिंता=चिमटा, 

Jagmohan Chachra के द्वारा
September 9, 2011

बहन बेटियों के लिए आपकी भावनावो ने मन को छू लिया |

    Ramesh Bajpai के द्वारा
    September 9, 2011

    स्नेही स्वजन बेटिया तो ऐसी दुलारी होती ही है | आपकी प्रतिक्रिया पा kar bahut achchha laga |

Krishan Kumar kashyap के द्वारा
September 9, 2011

आदरणीय बाजपेई जी आपकी कलम, से निकला हुवा यह अनमोल तोहफा बेमिशाल है | बेटिया पिता को माँ से कम प्यारी कभी नहीं होती | बधाई

    Ramesh Bajpai के द्वारा
    September 9, 2011

    आदरणीय श्री कृष्ण कुमार जी आपके इन सुन्दर मनो भावो का बहुत बहुत शुक्रिया |

raju के द्वारा
September 9, 2011

इन सुन्दर भावों के लिए आप प्रशंशा के पात्र हैं

    Ramesh Bajpai के द्वारा
    September 9, 2011

    स्नेही स्वजन इन उदगारो का प्रेषण मेरे लिए अमूल्य uphar hai | hardik dhanyvad vad

yashpal के द्वारा
September 9, 2011

नारी शक्ति का सम्मान हमारी संस्कृति का अभिन्न अंग है. आपकी कविता में निहितार्त भाव दिल की गहरे को छु जाते हैं. बधाई

    Ramesh Bajpai के द्वारा
    September 9, 2011

    श्रीमान यशपाल जी जी बिलकुल सही कहा आपने ‘यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते ,रमन्ते तत्र देवता ” अर्थात जहा नारी को यथोचित सम्मान मिलता है ,वहा देवताओ का स्वतः निवास होता है | हार्दिक shukriya |

Nitish Bose के द्वारा
September 9, 2011

आदरणीय बाजपाई जी नारी के इन रूपों को भाहूत ही आदर देना हमारा कर्तब्य है | बधाई

    Ramesh Bajpai के द्वारा
    September 9, 2011

    स्नेही श्री नितिन जी ये उदगार मन की गहराईयों में उतर गए है | शुक्रिया

K Prasad के द्वारा
September 9, 2011

आदरणीय बाजपाई जी मात्र शक्ति को मेरा नमन | सुंदर भाव

    Ramesh Bajpai के द्वारा
    September 9, 2011

    प्रिय श्री प्रसाद जी इन अमूल्य भावो का शुक्रिया |

rahulpriyadarshi के द्वारा
September 7, 2011

वैसे एक बात इमानदारी से कहूँगा की इस कविता के मर्म को समझने के लिए अनीता पॉल को जानना भी बेहद जरुरी है,मैंने पहली बार इस रचना को पढ़ा तो अच्छी लगी लेकिन अनीता पॉल के जिक्र से मैं जरा चौंक सा गया,लगे हाथों मैंने गूगल पर सर्च भी मारा की ये कौन सी महान विभूति हैं,किन्तु संतोषजनक समाधान नहीं मिला,सौभाग्य से आज राजकमल जी का लेख पढ़ते समय अनीता पॉल जी की टिपण्णी पढ़ी,वहाँ से लिंक पकड़कर उनके ब्लॉग पर गया,कुछ रचनायें पढ़ी,थोडा थोडा उनकी महानता से साक्षात्कार हुआ,और अब जब मैं आपकी कविता को पढता हूँ तो सच कहूं आपकी लेखनी को चूम लेने का मन करता है,इतनी सटीक और सारगर्भित रचना जिस ले में आपने रच डाली है,उसमे गहरे अर्थ निहित हैं,आप निस्संदेह प्रशंसा और वंदन के पात्र हैं.

    Ramesh Bajpai के द्वारा
    September 9, 2011

    स्नेही श्री राहुल जी आपकी प्रतिक्रिया ने शीतल हवा के झोके की तरह मन को सहला सा दिया है | हार्दिक बधाई | shubh kamnaye

chaatak के द्वारा
September 3, 2011

आदरणीय बाजपेयी जी, सादर प्रणाम, कविता में कहीं एक गहरा दर्द छिपा है माँ के सीने में एक निहायत कोमल दिल होता है सभी एक स्वयं सिद्ध सिद्धांत की तरह मानते हैं परन्तु इन पंक्तियों में दबा एक पिता का दर्द सोचने पर मजबूर करता है कि क्या इस बात की तुलना हो सकती है कि स्त्री और पुरुष में ज्यादा संवेदनशील वास्तव में कौन है? मैं तो सिर्फ एक निष्कर्ष तक पहुंचा हूँ कि बेटी के लिए एक पिता से ज्यादा संवेदना किसी में नहीं होती| अप्रतिम भाव और वात्सल्य से भरी पंक्तियाँ पढ़कर एक सुखद अनुभूति हुई कि कुछ चीज़ें ऐसी हैं जिन्हें सिर्फ महसूस किया जा सकता है बयान नहीं किया जा सकता| अच्छे भावों द्वारा मार्गदर्शन का धन्यवाद!

    Ramesh Bajpai के द्वारा
    September 4, 2011

    प्रिय श्री चातक जी आपकी संवेदनशीलता ,भावनाओ को गहराई से परखने का इश्वर प्रदत्त गुण ,ह्रदय की अतुल्य प्रेम मई सहजता से हम सब भली भाति परिचित है | आपने मेरी व्यथा को महसूस ही नहीं किया बल्कि उसका जीवन्त चित्रण भी कर दिया | आपका यही अंदाज आपके लेखन को गरिमा से भर भी देता है | आपका कथन यह स्पस्ट कर रहा है की बेटियों के लिए पिता की संवेदना कभी कम नहीं होती , व पिता की दृष्टि में सब बेटिया लाडली ही होती है | यहाँ अपने पराये का भेद होता ही नहीं | उनका दर्द ,उनके आंसू पिता के चट्टान से दिल को पिघला देते है | उदारता से दी गयी इस प्रतिक्रिया के लिए मै आपको हार्दिक धन्यवाद देता हु | शुभ कामनाओ सहित

jlsingh के द्वारा
September 3, 2011

बिटिया अनीता पॉल!—- बाजपेयी साहब, सादर अभिनन्दन! नारी के विभिन्न रूपों की सुन्दर प्रस्तुति!

    Ramesh Bajpai के द्वारा
    September 4, 2011

    श्री जे यल सिंह जी नारी के ये विविध रूप आपको भाए,तथा आपने अपनी बहुमूल्य प्रतिक्रिया से उत्साह वर्धन किया | हार्दिक शुक्रिया

Alka Gupta के द्वारा
September 3, 2011

आदरणीय बाजपेयी जी, सादर अभिवादन अमूल्य भावों से परिपूर्ण नारी के विभिन्न रूपों का वर्णन करती हुई आपकी यह उत्कृष्ट रचना बहुत कुछ बयां कर रही है….!

    Ramesh Bajpai के द्वारा
    September 4, 2011

    आदरणीया अलका जी हमारी बेटिया शक्ति रूपा नारी के हर रूप को सार्थक कर हर क्षेत्र में सफल हो रही है | मानवीय संवेदना को प्रदर्शित करती सहज भावो से भरी यह प्रतिक्रिया मुझे बहुत सुखद लगी | शुभ कामनाओ सहित

roshni के द्वारा
September 2, 2011

आदरणीय बाजपेयी जी नमस्कार बहुत ही सुंदर कविता सब कुछ कहती हुई … मंच पर काफी दिनों बाद ई और इतनी सुंदर कविता देखी .. बहुत खूब आदर सहित

    Ramesh Bajpai के द्वारा
    September 3, 2011

    रौशनी जी कृष्ण भक्त संत मीरा बाई से अगाध प्रेम करने वाला आपका मन सहज मानवीय संवेदनाओ से भरा है | इधर काफी दिनों से आप की कोई रचना भी पढने को नहीं मिली | आपको यथाशीघ्र मीरा जी की जगत जननी राधा रानी पर पोस्ट भेट करुगा | मंगल कामनाओ सहित

surendra shukl bhramar5 के द्वारा
September 2, 2011

आदरणीय बाजपेयी जी एक अजब ही रस से भरी ये आप की कविता कुछ नया अंदाज न जाने क्या क्या कह गयी बताने जताने के बहुत से तरीके होते हैं ये आप ने सिद्ध कर दिया ..मेरे लिए ये अंदाज भी नहीं छोड़ा आप ने … नारी के इन रूपों को जरा गौर से देखो बिटिया अनीता पॉल कही नजर आती है | धन्यवाद

    Ramesh Bajpai के द्वारा
    September 3, 2011

    प्रिय श्री शुक्ल जी आपने अपनी भावनाओ को उसी सरलता व सहजता से प्रेषित कर दिया है जिसका रसास्वादन आपकी रचनाओ से सदा ही करने को मिलता है | मेरी यह पोस्ट ओजस्वी ,प्रतिभावान प्रखर लेखिका जीवन्त साहस की प्रतिमूर्ति ,जुझारू व्यक्तित्व की धनी हिदुस्तानी लाडली के लिए है ,जो एक दिन सफलता व साहस के नवीन कीर्तिमानो का सृजन करेगी |

rajkamal के द्वारा
September 2, 2011

आदरणीय वाजपेई जी ….सादर प्रणाम ! जिन खोजा तिन पाइया गहरे पानी पैठ यह कहावत भी इन पर लागू नहीं होती है ….. आपकी इस गागर में सागर की जितनी भी तारीफ की जाए वोह कम ही होगी इतनी बेहतरीन रचना पर मुबारकबाद

    Ramesh Bajpai के द्वारा
    September 3, 2011

    प्रिय श्री राज जी मुझे यह कहने में जरा भी संकोच नहीं है की मै वह खुसनसीब हु जिस पर आपने दोनों हाथो से सदा सम्मान व आदर लुटाया है | राज जी मै आप लोगो से इतना ज्यादा नजदीक हो गया हु की उनुपस्थिती की स्थिति में अच्छा नहीं लगता | जीवन की अनंत व्यस्तताओ के बीच मेरी यह मनोबृत्ति ठीक नहीं है | हम एक दुसरे के सुख दुख को साझा करने का प्रयत्न करते है | समय की तुलिका ने अगर किसी के सपनो में कालिमा भर दी है तो हम उन सपनों को सहलाने ,सहेजने में क्या मदद नहीं कर सकते | मेरी कोशिश मेरा स्नेह सदा आपके साथ

Harish Bhatt के द्वारा
September 2, 2011

आदरनीय वाजपेयी से सादर प्रणाम……… बहुत ही अच्छी कविता के लिए हार्दिक बधाई.

    Harish Bhatt के द्वारा
    September 2, 2011

    आदरनीय वाजपेयी जी सादर प्रणाम……… बहुत ही अच्छी कविता के लिए हार्दिक बधाई

    Ramesh Bajpai के द्वारा
    September 3, 2011

    प्रिय श्री हरीश जी इस बहुमूल्य प्रतिक्रिया के लिए हार्दिक धन्यवाद |

    Ramesh Bajpai के द्वारा
    September 9, 2011

    आपके भावो का शुक्रिया

abodhbaalak के द्वारा
September 2, 2011

आदरणीय बाजपेई जी कभी कभी एक बड़ा लेख वो बात नहीं कह पाटा जो की केवल कविता के चाँद बोल….. आपकी इस पोस्ट के बारे में बस यही कह सकता हूँ, की आपने आइना दिखया है ….. धन्यवाद आपका … http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

    Ramesh Bajpai के द्वारा
    September 3, 2011

    प्रिय श्री अबोध जी बिलकुल ठीक कहा आपने | मनोभावों की व्यथा की अभिव्यक्ति चंद शब्दों में भी की जा सकती है | हमारी बेटिया , बहने अगर हमारे बीच आकर अपनी पीड़ा को भूलना चाहती है तो उनको सहेजना सांत्वना देना ,हौसला देना हमारा कर्तव्य है | नियति के जिस क्रूर पंजे ने उनके सुनहरे सपनो को निगल लिया है उन्हें उस भय से मुक्त होने के लिए हम सब लोग अगर कुछ कर सकते है तो जरुर करना चाहिए | आप की इस बहुमूल्य प्रतिक्रिया का सदा शुक्र गुजार रहूगा |

Santosh Kumar के द्वारा
September 2, 2011

श्रद्धेय रमेश जी ,..सादर प्रणाम बहुत सुंदर वर्णन ,..बस ………सादर आभार

    Ramesh Bajpai के द्वारा
    September 3, 2011

    प्रिय श्री संतोष जी इन अनमोल उदगारो का हार्दिक शुक्रिया |

nishamittal के द्वारा
September 2, 2011

नारी के विविध रूपों पर बहुत अच्छी रचना बाजपेयीजी,परन्तु यदि अस्तित्त्व है ही नहीं तो टेंशन क्यों लें.

    rameshbajpai के द्वारा
    September 2, 2011

    आदरणीया निशा जी इस त्वरित प्रतिक्रिया के लिए शुक्रिया | मेरा तो यही कहना है ” वे है ठीक है , नहीं है तो भी क्या , बेटिया तो माता पिता के सपनो में भी खिलखलाती है “| वे है ठीक है , नहीं है तो भी क्या , बेटिया तो माता पिता के सपनो में भी खिलखलाती है |

    nishamittal के द्वारा
    September 4, 2011

    उनकी खिलखिलाहट ही घर को चहचाहट से पूर्ण रखती है,जो परिवारों में दुर्लभ होती जा रही है.

    Ramesh Bajpai के द्वारा
    September 4, 2011

    बिलकुल ठीक कहा आपने | बेटियों को खिलखिलाहट से घर ,परिवार ,समाज व राष्ट्र को गुंजायमान होना ही होगा | उनको संरक्षण ,शिक्षा दुलार देना होगा |


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