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हे परी लोक की राज कुँअरि

Posted On: 20 Mar, 2014 Others में

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हे रूप राशि हे मृग नैनी हे दाड़िम दन्तो वाली |

हे कोकिला स्वरी,मृदु बैनी केश राशि काली काली |
हे परी लोक की राजकुअँरि , दर्शनीय अधरो की लाली
हे सुंदरी मदिरा घट ग्रीवा ,कटि केहरि सी मतवाली |
तेरे रुखसारों को छूने ,मै आंसू बन कर बहलूगा |
इन कजरारे नैनों में मै काजल बन रह लुगा |
तेरे रक्तिम अधरो को मै भंवरा बन कर चूमूंगा |
पांवो में पायल बन कर मै छम- छम बज लुगा |
क्या कहु प्रिये मै बनू महावर तलवो में भी सज लूंगा |
होली में तुम जो भी चाहो वह बन कर मै बज लूंगा |
मेरा प्रणय निवेदन गोरी सब होरी की माया है |
भांग नहीं खायी जीवन में बस फागुन छाया है |
( मित्रो फागुन का नशा मुझ पर भंग से भी ज्यादा चढ़ता है | श्रंगार रस लिखते लिखते बहक गया हु | बुरा न मनो होरी है

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15 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

surendra shukla bhramar5 के द्वारा
March 26, 2014

तेरे रुखसारों को छूने ,मै आंसू बन कर बह लूँगा | इन कजरारे नैनों में मै काजल बन कर रह लूँगा | पांवो में पायल बन कर मै छम- छम कर के बज लूँगा | आदरणीय बाजपेयी जी बहुत सुन्दर श्रृंगार, प्रणय, होरी की माया…रचना में सब समाया हुआ ..सुन्दर.. जल्दबाजी में हिंदी बनाने में शब्द कुछ चिपक या कट गए हैं कृपया ध्यान दें तो गेय हो भ्रमर ५

    Ramesh Bajpai के द्वारा
    March 26, 2014

    प्रिय श्री शुक्ल जी पेज सेटिंग में ही दिक्कत आ रही है |कोशिश कर रहा हु | अब आप कहा है प्रतापगढ़ या पंजाब | पोस्ट को सराहने के लिए धन्यवाद |

Aakash Tiwaari के द्वारा
March 25, 2014

आदरणीय श्री बाजपेयी जी, आपके शब्दों को पढ़कर मन और आत्मा को जो एक अजब सी अनुभूतिहोती है वो और कहा..रही श्रृंगार रस लिखने कि तो जनाब ये जमाना “रागिनी MMS २” का है तो कृपया दिल में कहीं भी ऐसा विचार न लाये कि आपने कुछ भी ज्यादा लिखा.. होली पर आपकी एक जबर्दस्त रचना.. =आकाश तिवारी=

    Ramesh Bajpai के द्वारा
    March 26, 2014

    प्रिय श्री आकाश जी उदारता से भरे इन भावो का शुक्रिया | शुभकामनाओ सहित

ANAND PRAVIN के द्वारा
March 25, 2014

http://anandpravin.jagranjunction.com/2014/03/24/%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%A4-%E0%A4%AE%E0%A4%BF%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0-%E0%A4%AE%E0%A4%82%E0%A4%9A-%E0%A4%AC%E0%A5%8D%E0%A4%B2%E0%A5%89%E0%A4%97%E0%A4%B0-%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%9A-2/ आपभी शामिल हों इस महामेला में………..सादर आपत्ति होने पर कृपया कमेन्ट डिलीट कर दें……

    Ramesh Bajpai के द्वारा
    March 26, 2014

    जरुर मै पहुँचूगा | धन्यवाद |

    Ramesh Bajpai के द्वारा
    March 26, 2014

    इस उदगारो के लिए हार्दिक धन्यवाद |

    Ramesh Bajpai के द्वारा
    March 26, 2014

    क्षमा करे कृपया इस को इन पढ़े

alkargupta1 के द्वारा
March 22, 2014

आदरणीय रमेश भाई जी , सादर अभिवादन अति सुन्दर मनोहारी भावाभिव्यक्ति

    rameshbajpai के द्वारा
    March 23, 2014

    आदरणीया बहन अलका जी व्यस्ताओं ने आप सब से दूर किया था | पर सब को याद करता रहा ,खास कर राखी व भाईदूज पर आपकी बहुत याद आयी | पोस्ट पर आने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद |  

    Aakash Tiwaari के द्वारा
    March 25, 2014

    आदरणीया अलका जी और बाजपेयी जी बहुत याद आती थी जागरण से दूर रहकर..सच कहूं तो शायद ये जीवन कि एक दिनचर्या सा बन चुका है जिससे दूर जा पाना बहुत मुश्किल है… =आकाश तिवारी=

    Ramesh Bajpai के द्वारा
    March 26, 2014

    प्रिय श्री आकाश जी बिलकुल ठीक कहा आपने | मैं लिख तो नहीं पाया पर आप सब को भूल भी नहीं पाया | ईश्वर से प्रार्थना है कि सब लोग ठीक रहे व् मंच पर सक्रीय रहे | शुभ कामनाओ सहित

jlsingh के द्वारा
March 20, 2014

प्रणाम महोदय, मेरा प्रणय निवेदन गोरी सब होरी की माया है | भांग नहीं खायी जीवन में बस फागुन छाया है | सादर बहुत अच्छी अभिव्यक्ति, श्रृंगार रस से परिपूर्ण!

    rameshbajpai के द्वारा
    March 23, 2014

    प्रिय श्री जवाहर जी फागुन से सराबोर यह मन अतिरेक हर्ष में जब बहकता है तो कुछ इस तरह कि रचनाये आ जाती है | पोस्ट को सराहने का शुक्रिया |


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