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पुलिस लाइन में होली

Posted On: 25 Mar, 2014 Others में

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होली के ठीक दूसरे दिन सुबह पुलिस लाइन के मैदान में शामियाना तन गया ,लाउडिस्पीकर पर “हेले हेलो मैक टेस्टिंग के साथ विभाग के

वायरलेसके स्वर माइक से जुड़ पुरे मुहल्ले में गूंज उठे | रे बलभद्रर् तनी ढेला वाले को चाह के लिए कह दियो ,ससुर का नाती अभी तक नहीं लाया |सारा मोसन सुलो पड़ गया | कलुआ रे तनी झंडी ऊँचे से बांधना ,येस.पी
साहब को भी फील होना चाहिए कि हमरा जवान के दिल में फागुन ठीक वईसा घुसता है जइसे
सुन्नरी कि बरी बरी अंखियन में काजर , नाइका वियाही नारी के मांग में सिनुर | हा दुबे जी ख़ाली लोकेसन देबा कि कुछ औरो बोलबा | कइस कटा फागुन ……स र र र र र ……|
हम समझ गए कि हुकुम सिंह हवालदार के साथ साथ भारतीय पुलिस भी होरी के मूड में आ गयी है | अतः मै भी वहाँ का जायजा लेने पुलिस लाइन पहुच गया | यु भी कल शाम ही एक
आरक्षी घर पर धमकी दे गया था कि हवलदार सा ने बुलया है पंडित को ,मैक बजते ही पुलिस लाइन पहुच जाये वर्ना ………| अब यह अलग बात है कि हुकुम सिंह मेरे मित्र है |गाहे बेगाहे मेरी मदद कर देते है | कभी कभार मेरे घर चाय पीने आते है |तब मेरा सीना गर्व से चौड़ा हो जाता है |घरवाली तो अक्सर पड़ोसियों पर पुलिस की दोस्ती का रोब झाड़ लेती है |
शामियाने पर काफी गहमागहमी है | एक तरफ सिलबट्टे पर भांग की पिसाई हो रही है तड़ीपार बिरजुवा “भरि फागुन बाबा देवर लागै ,भरि फागुन .गाता .हुआ .. भांग पीस रहा है . |
मेज पार फूल सजे है | ठंढाई को स्टील की टंकियो में रखा गया है | बगल का होटल वाला देसी घी में समोसे तल रहा है |
सत्तो ताई हंस हंस कर हुकुम सिंह के कान में कुछ कह रही है | नगर का नामी मयखाना ताई का है उनकी इच्छा कि मैं उनकी चालीस साला बेटी को कुछ सिखाउ | बेटी पदमावत की व्याख्या पर जोर दे रही है | हे जायसी जी इस काया से इस उम्र में पदमावत न बाबा ,हमेसा इस तरह की परिस्थियो में मुझे बचाने वाले हे आत्मीय शाही जी , कृष्ण मोहन मिश्रा जी कहा है आप लोग | चोर रम चेलवा
बरफ से पानी ठंडा कर रहा है , मतलब ये की सारा माहौल दोस्ताना है |
बड़े साहब के आगमन की खबर आयी | साहब ने विधिवत उदघाटन किया ,|वायर लेश पर
होली की शुरुवात की जानकारी बतायी गयी | दरोगा जी को खुद साहब ने गुलाल लगाया | चोर उचक्को ने पस्पर एक दूजे को पुलिसिया संरक्षण में रंगा ,पुलिस से गुलाल लगवाया |
भांग ठंढाई के गिलास चढ़ने लगे | कई गिलास चढ़ाने के बाद हुकुम सिंह माईक पर ” मोरा पिया घर आया हो राम जी ,अलापने लगे | आरक्षी बेल्ट हिला हिला कर दबंग वाली स्टाईल में नाचने लगे | माईक पर कजरारे कजरारे वाला गाना बजने लगा | मै समझ गया की अब भागने में ही भलाई है ,वर्ना राजनांचे की बोहनी के नाम पर चढ़ावे का फरमान बस आने ही वाला है | सत्तो ताई की दुलारी मेरी तरफ आ रही है हे भगवान ……….. |
नोट -पढ़ कर कमेंट न दिया तो हुकुम सिंह से समझ लीजियेगा |

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10 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

abhishek shukla के द्वारा
March 29, 2014

नमस्कार सर! बहुत सुन्दर रचना…आनंद आ गया

    Ramesh Bajpai के द्वारा
    April 1, 2014

    प्रिय श्री अभिषेक जी पोस्ट पर भाव भरी प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद |

Ramesh Bajpai के द्वारा
March 29, 2014

प्रिय श्री शुक्ल जी होली उमंगो का त्यौहार है रंग जीवन में उमंगे भरते है | दुःख इस बात का है कि अब लोग नशे में अभद्रता से इसे मानना चाहते है , जो निंदनीय है |

surendra shukla bhramar5 के द्वारा
March 28, 2014

आदरणीय बाजपेयी जी …ये भी खूब रही ..बदला हुआ रंग होली के संग …सुन्दर …आरक्षी बेल्ट हिला हिला कर दबंग वाली स्टाईल में नाचने लगे | माईक पर कजरारे कजरारे वाला गाना बजने लगा भ्रमर ५

Aakash Tiwaari के द्वारा
March 28, 2014

आदरणीय श्री बाजपेयी जी, सत्तो ताई कि दुलारी के साथ आपने कैसी होली मनाई उसका भी विस्तार से वर्णन अगले भाग में भी जरुर करें..और हां श्रीमती बाजपेयी जी को आप उस लेख के बारे में एक काल्पनिक कहानी भी बता सकते है..मुझे पूरी उम्मीद है कि आपने सत्तो ताई कि दुलारी के साथ अवश्य होली मनायी होगी और विवशतावश लिख न पाये… …पूरे पुलिस लाइन के माहौल को जीवित क्र दिया आपने.. =आकाश तिवारी=

    jlsingh के द्वारा
    March 29, 2014

    इसका मतलब तो ये हुआ कि आप भी अगल-बगल से झाँका रहे थे तिवारी जी …सत्तो ताई की दुलारी की झलक पाने के लिए … जय हो जोगीरा सर र र र ..

    Ramesh Bajpai के द्वारा
    March 29, 2014

    प्रिय श्री आकाश जी सत्तो ताई की दुलारी से इस उम्र में होली खिलवा कर आप मेरी दुर्गति क्यों कर वाना चाहते है हा हुकुम सिंह ने ताई के साथ होली खेली है वह किस्सा आपको जरुर सुनाऊगा | शुभकामनाओ सहित

    Ramesh Bajpai के द्वारा
    March 29, 2014

    प्रिय श्री जवाहर जी मै इनको मिलवा दुगा , अभी तो होली के कई प्रसंग आने शेष है | दुलारी की होली आ सब के साथ | ” फागुन अभी बाकी है ” जोगीरा स र र र र ………..|

    Aakash Tiwaari के द्वारा
    March 29, 2014

    आदरणीय श्री जवाहर, बाजपेयी जी मुझे क्यूँ ऐसा पता बताकर अपनी जगह कमजोर करेंगे..आखिर मेरे वहाँ रहने पर सत्तो ताई की दुलारी का ध्यान मेरी तरफ ही जाता. और श्री बाजपेयी जी ऐसा कभी नहीं चाहते..आखिर होली का ही तो मौका होता है.. =आकाश तिवारी=

    Aakash Tiwaari के द्वारा
    March 29, 2014

    आदरणीय श्री जवाहर जी,, पढ़ें.


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