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पुलिस लाइन शामियाने से

Posted On: 4 May, 2014 Others में

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मनोजवा की बात सुनते ही हुकुम सिंह चौकन्ने हो गए | उनके बाल चोर ,उचक्कों ,शातिर बदमासो से मुकाबला करते हुए ही सफेद हुए है | उन्होंने ताई के कान में कुछ कहा और छलांग लगा कर माइक पर पहुंच गए |
“हेलो हेलो मैक टेस्टिंग ‘ रे बलभदरा दू घंटा पहिले तुमको बताया था कि पुलिस लाइन की समस्त महिलाओ को शामियाने में आने का अनुरोध घर घर चहुँपाओ [पहुचाओ ] और कहा था कि कलुआ का दोकान [दुकान] से पाव भर रबड़ी व सेर भर जलेबी हवलदारिन सा को मेरी तरफ से भेट कर यहाँ पंडाल में गुलाल खेलने का मनुहार कर दो |मगर ससुर का नाती तू तो भांग पीकर यहाँ ढेर है | रे मनोजवा तनी अपनी माई को मेरी तरफ से नमस्ते कर पंडाल में ला तब तक मैं बाकी महिला जन को यहाँ पहुचने का निमन्तंन [निमंत्रण ] देता हू|”
हुकुम सिंह ने कनखियों से हवलदारिन को देखा ,सचमुच जैसे जादू हो गया तनी हुयी भंगिमा हलकी मुस्कान में बदली व झाड़ू वाला हाथ नीचे हो गया |
हुकुम सिंह खिलखिला कर हँसे | सच कहता हू हँसती हुयी पुलिस मुझे बहुत अच्छी लगती है| माईक पर वे चहके ” मैं बताना चाहता हू समस्त महिला मंडल को ताई अपने हाथो उपहार देगी ‘किरपा कर आप ग्रहन करे | आरक्षी नारायण चौबे तीन जवान के साथ फूल माला से हवलदारिन सा का स्वागत करे |”
गले में फूलमाला पहने हवलदारिन यह सोच रही थी कि पाव भर रबड़ी में आधी तो मनोजवा चट कर जायेगा , आध पाव हवालदार सा को देनी होगी ,भला आज त्यौहार के दिन सूखी जलेबी मैं कैसे खाऊगी | यह बात हवालदार सा को बतानी पड़ेगी अभी |
इधर श्री आकाश तिवारी जी व श्री जवाहर जी दुलारी को अमरुद के गुण काफी देर से समझा रहे है |
“‘सो बात जो आप लोग कह रहे है वो हमरे पल्ले नहिये पड़ी ,काहे कि हमको पता है अमरुद का भाव अउर सोना का भाव में बहुते अंतर है | अब तुम बताओ अमरुद का भाव का है ?
“दुलारी जी हम भाव कि नहीं गुण का बात कह रहे है ” आकाश जी बोले |
“न न कटि कंचन को काटि का कुछ मतलब तो होगा |पंडित जी को हम बहुत नजदीक से जानते है वो बिना मतलब कि बात तो करते ही नहीं ,बस कमी उनमे एकै है हमरा सामना होते ही भागने का फ़िराक में पड जाते है “|
“देखो दुलारी हम बताते है प्राचीन काल में सुंदरिया कटि यानी कमर में कंचन यानी सोने के भारी आभूषण पहनती थी | सो महगाई को देखते हुए आदरणीय श्री बाजपेयी जी ने उस भारी गहने को काट कर हलके गहने बनवाने व बाकी सोना बेचने की खातिर ही काटने की बात लिखी होगी “|
“न जवाहर भइया न पंडित जी बेकार की काट कूट में भेजा नहीं खपाते बात कुछ और ही है “|
“दुलारी जी तुम जवाहर भईया की जगह जवाहर जी कहो तो अच्छा लगेगा “|
“न जवाहर भईया, जी तो हम पंडित जी के आगे ही लगायेगे | आपको व आकाश भईया को हम भईया ही कहेंगे | हा न मंजूर होतो अपना अमरुद वापिस लेलो ‘मैं चली|अब पंडित जी से ही पूछूँगी “|
अब आलम यह है की उधर दुलारी मुझे ढूंढ रही है | इधर मेरे दोनों साथी मुझे ताक रहे है |
भगवान अब अगली होली तक ये लोग मुझे यु ही ढूढ़ते रहे |

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7 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

surendra shukla bhramar5 के द्वारा
May 7, 2014

अरे बाजपेयी जी कह लेने दीजिये न भैया सब का मनवा साफ़ हो जाएगा किसी की आरजू में खलल काहे का … मनोरंजक व् व्यंग्य युक्त अच्छा लेख .. भ्रमर ५

alkargupta1 के द्वारा
May 5, 2014

आदरणीय रमेश भाई जी , सादर अभिवादन आपकी इस रचना की शैली पढ़ने में बहुत अच्छी लगी बहुत ही अच्छा व्यंग्य किया है

    Ramesh Bajpai के द्वारा
    May 6, 2014

    आदरणीया बहन इस रसीली पोस्ट पर आपकी गरिमामयी उपस्तिथि से बहुत सम्बल मिला | क्योकि पोस्ट काफी पीछे चल रही है ,पर आख्यान पूर्ण करने की लालसा जरूर है | शुभ कामनाओ सहित

jlsingh के द्वारा
May 4, 2014

मनवा में गुदगुदी हो रहा है … चातक जी भी टपक पड़े हैं शामियाने में …आकाश भैया को खोजना पड़ेगा कहीं भुला गए हैं का? प्रणाम सर जी एक दम ठेठ भाषा में दमदार होली!.. लेकिन रबड़ी थोड़ा कम लग रहा है, सुखले जिलेबी में ओतना मजा तो नहिये आयी पर अमरुदवा का गुण तो समझ जइयो दुलारी जी …ई कटि कंचन को काटी के फेर में काहे को पड़ी हो…जय राम जी की …

    Ramesh Bajpai के द्वारा
    May 6, 2014

    प्रिय श्री जवाहर जी मंच पर मेरे शुरुवाती लेखन के समय सेश्री चातक जी पोस्टो में सक्रिय सहयोग देते रहे है | अब वही सहयोग आप लोगो से मिल रहा है | अमरुद का गुण दुलारी जी को अब आपको ही समझाना पड़ेगा ,काहे की श्री आकाश जी पता नहीं कहा है | बाकि अब फागुन को समेटना ही पड़ेगा | पर यह आख्यान पूर्ण हो जाय|

chaatak के द्वारा
May 4, 2014

“न जवाहर भईया, जी तो हम पंडित जी के आगे ही लगायेगे | आपको व आकाश भईया को हम भईया ही कहेंगे | हा न मंजूर होतो अपना अमरुद वापिस लेलो ‘मैं चली|अब पंडित जी से ही पूछूँगी” क्या बात है! वाह बाजपेयी जी बहुत दिनों बाद व्यंग का आनंद आया !

    Ramesh Bajpai के द्वारा
    May 6, 2014

    प्रिय श्री चातक जी आपकी उत्साह वर्धक अभिव्यक्ति पा कर अच्छा लगा | शुभकामनाओ सहित


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